सोचा नहीं था जिंदगी इस कदर मोड़ लेगी,
एक प्यारी सी ख्वाहिश को पल भर में तोड़ देगी,
किसे गुनहगार कहूँ अपने इस मंजर के लिए तू बता,
शायद मैं ही एक गलत ख्वाहिश कर गया हूँ..
अनजान से इस दिल को किसी की आहट सी हो गयी थी,
और ये जान कर उस दिल को शिकायत सी हो गयी थी,
इनकार करने से क्यू मुकरते हैं वो जान ही न सका,
पर बिन इज़हार के इस प्यार की शायद उन्हें भी आदत सी हो गयी थी..
बिन सोचे ही अपने एहसासों को हम बढ़ाते चले गए,
और वो भी बड़ी शिद्दत से हमे आजमाते चले गए,
एक फासले के बाद जब लगा एक उम्मीद कर के देख लें,
और बस उम्मीदों को वो उसी पल में जलाते चले गए..
यकीन होता है अभी की कितना मजबूर हो गया हूँ,
पास करके उन्हें मैं कितना दूर हो गया हूँ,
जिंदगी उनके इर्द-गिर्द समेट सा गया हूँ,
और अब बस एक मजाक सा बनके रह गया हूँ..
दिल कहता है उनका कि वो मेरे होना नहीं चाहते,
फिर क्यू कहती है जुबाँ कि मुझे खोना नहीं चाहते,
बिन पूछे प्यार करने का एक गुनाह कर गया हूँ,
और अब अपने लिए ही एक मजाक सा बन गया हूँ..
सब कुछ बोल के अब थक सा गया हूँ,
और एक मजाक सा बनकर अब रह सा गया हूँ..